हे! सुमंत्र राज्याभिषेक की करो तैयारी।
कवि विवेक कुमार सरायमीरा कन्नौज अस्ताचल में छिपा सूर्य फिर उदित हुआ है।अवधपुरी का हर जन मानस मुदित हुआ है।जीवित रहे वचन रघुकुल की रीति निभायी।पूर्ण हुआ वनवास पुनः दीवाली आयी॥सप्त सिंधु जल कलश उठाओ बारी बारी।हे! सुमंत्र राज्याभिषेक की करो तैयारी। पांच शतक की पूर्ण हुयी है आज प्रतीक्षा।रामलला की होने वाली प्राण प्रतिष्ठा…

