सुप्रीम कोर्ट ने नवाब सिंह यादव की जमानत की निरस्त
• गैंगस्टर एक्ट में हाईकोर्ट से मिली थी जमानत, शासन की याचिका पर शीर्ष अदालत ने सुनाया फैसला
कन्नौज। उत्तर प्रदेश शासन और कन्नौज पुलिस की प्रभावी पैरवी के चलते माफिया एवं गैंगस्टर नवाब सिंह यादव को बड़ा झटका लगा है। सर्वोच्च न्यायालय ने इलाहाबाद हाईकोर्ट से मिली उसकी जमानत निरस्त कर दी है। मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश शासन की विशेष अनुमति याचिका स्वीकार करते हुए यह आदेश जारी किया। पुलिस के अनुसार, नवाब सिंह यादव पुत्र स्व. चेतराम यादव निवासी अड़ंगापुर के खिलाफ कोतवाली कन्नौज में पॉक्सो एक्ट समेत कई गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज है। आरोप है कि मुकदमे की पीड़िता का मेडिकल परीक्षण करने वाली महिला चिकित्सक को न्यायालय में गवाही देने से रोकने के लिए धमकाया गया था। इस मामले में अलग से मुकदमा दर्ज किया गया था। इसके बाद पुलिस ने आरोपी के खिलाफ 13 जुलाई 2025 को गैंगस्टर एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया था। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 18 अप्रैल 2026 को उसे जमानत दे दी थी। इसके खिलाफ प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दाखिल की थी। एसएलपी संख्या 15873/2026 पर सुनवाई के बाद तीन नवंबर को शीर्ष अदालत ने जमानत निरस्त कर दी। इस मामले में प्रभारी निरीक्षक जितेंद्र प्रताप सिंह और कांस्टेबल प्रवीन जाट ने प्रभावी पैरवी की। पुलिस ने इसे अपराधियों के विरुद्ध कार्रवाई में बड़ी सफलता बताया।


